Real culprit in Democracy is the Public itself. Dharmik Stance on Govt. Employees.
ये News देखिये, उसके साथ इस खबर को स्पष्ट करता हुआ ये परफेक्ट वीडियो भी देखिए। ....अब ठंडे दिमाग से सोचिये कि इन सरकारी दामाद (सरकारी कर्मचारियों) को कौनसे दुष्टों की कैटेगरी में रखोगे ?? ......मैं बार बार कहता आया हूँ कि देश की साधारण जनता जिन समस्याओं का रोना रोती रहती हैं उनमें बहुत बड़ा योगदान खुद जनता का ही है। क्योंकि एक तो सैद्धांतिक रूप से देश में शासन चलाने हेतु लोकतंत्र चल रहा है और प्रशासन भी इस जनता में से ही आने वाले लोग चला रहे हैं। ......ये ऐसे ढेरों (मेरे अंदाज से 70%) हरामखोर, निकम्मे, घूसखोर और जनता को परेशान रखने वाले सरकारी कार्यालयों के कर्मचारी, बाबू, पुलिस वाले, सरकारी अधिकारी आदि कहीं मंगल ग्रह से उतरकर नहीं आते, किसी राजनैतिक दल के नेता/कार्यकर्ता नहीं होते (जिन्हें हम हर समस्या के लिए कोस देते हैं)। ये सब इसी आम जनता में से आते हैं। ये सारे सरकारी दामाद हममें से किसी के कोई पारिवारिक सदस्य, रिश्तेदार या मित्र ही होते हैं। ....आप याद करने की कोशिश करिये, अगर आपको जीवन में कोई सरकारी काम में परेशानी हुई है या निजी जीवन में कोई लड़ाई झगड़ा या किसी की दादागिरी स...