OBC is the last Obstacle for Breaking India Forces

        मैं एक जाट हूँ; जाहिर है एक भारतीय हिन्दू हूँ परन्तु अचरज में हूँ कि हरियाणा जाट आरक्षण आंदोलन से चर्चा में आये कोई यूनियनिष्ट मिशन वाले व कुछ अन्य दुष्टों ने सोशल मीडिया में बैठकर हरियाणा से लेकर राजस्थान, up तक के जाटों में इतना जाटत्व भर दिया है कि बहुत से जाट युवा, हिंदुत्व से दूर हो सकते हैं। जाट प्राइड और जाट एकता वाले नारों के बीच वो कहते हैं कि जाट हिन्दू नहीं होते, जाट खुद एक अलग धर्म है, हिन्दू तो कोई धर्म होता नहीं; बल्कि पश्चिम यूपी के जाट गोत्र वाले(धर्मान्तरित) मुसलमानों को अपना भाई बताते हुए जाट नस्ल की बात करते फिरते हैं। किसान जातियों को इस जातिवाद के भ्रमजाल में उलझाने हेतु उनका बाकायदा नारा है "लड़ाई फसल और नस्ल की है"।

शायद आपको पहले से पता हो, पर आजकल चल रहे इस कथित किसान आंदोलन को जाट आंदोलन बनते देखकर आपको फिर से बता रहा हूँ...कि ये सब कहानी उसी दिशा में है, कि भाई "जाट तो हिन्दू नहीं होते"। मेरे जैसे चंद लोग इनसे कई सालों से सोशल मीडिया में जूझ रहे हैं(क्योंकि इनका अटैक वहीं से शुरू होता है) और इधर जाटत्व से भरे भोले जाट (विशेषतः युवा) इसे समझने को मुश्किल से तैयार होते हैं।

        कोई मनोज दूहन (जो हरियाणा जाट आरक्षण आंदोलन में तोड़फोड़, भड़काऊ बयान तथा देशद्रोह आदि की धाराओं में 3-4 साल जेल काटकर आया है, और अब कहने को सिख बना घूमता है) और सांगवान सरनेम के पिता-पुत्र दो दुष्ट इस यूनियनिष्ट नामक मिशन के कर्ताधर्ता हैं। काफी लिटरेचर तैयार करके बांट चुके हैं व लोगों की कैडर मीटिंग आदि करते रहते हैं। चूंकि ये जाटों को सीधे मुसलमान/ईसाई नहीं बना सकते तो अपने फंडिंग करने वाले आकाओं को दिखाने के लिए 20 अप्रेल 2021 (जाट संत धन्ना भगत की जयंती) को गाजे बाजे के साथ एक सामूहिक धर्मपरिवर्तन कार्यक्रम करते हुए कुछ जाटों को सिख(?)बनाने जा रहे हैं। अतः लगता है कि फंडिंग उनकी शायद खालिस्तानियों से है, और खालिस्तानियों की फंडिंग तो पता ही है पाकिस्तान और चीन से है। यहां दिक्कत सिख बनने से नहीं बल्कि अकारण ही ऐसा करने की मंशा वाली इनकी डिवाइड पॉलिसी से है। ये कुछ स्क्रीनशॉट देखिये -



      

 

        ऐसी बातों के इनके सोशल मीडिया के ढेरों स्क्रीन शॉट और लिंक मैं जमा करता रहा हूँ। उनमें से कुछ तथ्यों को लेकर इनके द्वारा हर 13 अप्रेल को मनाये जाने वाले कथित जाट दिवस (जिसपे इन्होंने पिछले साल बड़े बड़े जाट सेलेब्रिटियों तक से ट्वीट करा लिए थे) विषय पर अपने क्षेत्र के लोगों के लिए एक वीडियो https://youtu.be/SLp8UbEGmXw बनाया था ताकि उनका Stance, Dharmik बनाने का प्रयत्न करूं।

        इन्होंने इतना नेटवर्क बना रखा है कि इलाके के सभी छोटे बड़े सरकारी जाट कर्मचारी, स्थानीय जाट राजनेता व जाट छात्र नेता इनके बनाये वीर तेजाजी, जाट ध्वज विचार मंच आदि व्हाट्सएप्प ग्रुपों में बिना पूछे उनका मोबाइल नंबर ढूंढकर जोड़ दिए जा रहे हैं और वो लगातार अनजाने में जाट प्राइड के नाम पर इनका विभाजनकारी कम्युनिष्ट लिटरेचर कंज्यूम कर रहे हैं ( हनुमान बेनीवाल की पार्टी का कैडर भी या तो इस कुकर्म में पूरी तरह शामिल है या ऐसे दुष्ट लोग उसपर जाट पार्टी का ठप्पा लगाकर पार्टी के नैरेटिव पर कब्जा करने हेतु उसका नाम लिए फिरते हैं)।

        इनका एक और मोडस ऑपरेंडी बताना चाहूंगा - इनके लिए ये झूठा और कंफ्यूज करने वाला लिटरेचर तैयार करने में कुछ यूनिवर्सिटी के कम्युनिष्ट प्रोफेसर, वकील आदि बिके हुए या कंफ्यूज बुद्धिजीवी लगे हैं, जो खुद जाट हैं (दुष्टों ने जानबूझकर जाट लोग चुने हैं) और इसी कारण अधिकतर साधारण जाट उनको सोशल मीडिया आदि पर सुन लेते हैं। ऐसे अधिकतर बुद्धिजीवी हनुमान बेनीवाल की पार्टी (RLP) को जाट जातिवाद के रंग में रंगकर खड़ा करने हेतु अपने लिटरेचर व प्रचार तंत्र के बल पर उसी तरह प्रमोट करने में लगे हैं, जैसे कभी केजरीवाल को खड़ा किया गया था (खुद हनुमान बेनीवाल को ये पता है या नहीं, यह नहीं कह सकते)। इन दुष्ट कम्युनिष्ट बुद्धिजीवियों ने राजस्थान में जाट बनाम राजपूत कर रखा है। कोई हिंदुओं को कथित विदेशी आर्य सिद्धांत से भी अलग थाइलैंड की कथित वेश्याई संस्कृति से आया हुआ बताते हैं (जाट को तो हिन्दू में काउंट ही नहीं करते), तो कोई समस्त किसान वर्ग(अंतिम टारगेट जाट समेत पूरा OBC वर्ग है) को नया आदिवासी वर्ग बताकर (पिछड़ा/शोषित घोषित करने हेतु) "आदि किसान" केवल लिख ही नहीं रहे जमीन पे काम करने वाले रजिस्टर्ड संगठन आदि भी चल रहे हैं। यूपी के मुसलमान बने जाट उनके भाई हैं जबकि पड़ौस में रहने वाले बनिया और ब्राह्मण शत्रु हैं।

        उनके चंगुल में फंसी भेड़ों(भोले जाट/किसान) को आजाद कराने हेतु जब हम उनको नास्तिक कम्युनिष्ट परन्तु जिहाद अपोलॉजिस्ट कहते हुए इस्लाम आदि पे घेर लेते हैं या अन्य तर्कों से उन्हें झूठा और षणयंत्रकारी सिद्ध करने लगते हैं तो वो तुरंत ब्लॉक कर देते हैं। और भेड़ें फंसी रह जाती हैं।

        SC-ST में आने वाले वर्ग को तो ग्लानि अनुभव कराकर इन दुष्टों ने ठिकाने लगा दिया पर जाट, गुर्जर, यादव आदि OBC में आने वाले वर्ग को जातीय अहंकार अनुभव कराकर जातिवादी बनाया जा रहा है। अगला टारगेट OBC है(ये सभी आरक्षणवादी गुर्गे OBC को SC ST से जोड़कर कोई कथित बहुजन वर्ग बनाने की जद्दोजहद में इसीलिए तो लगे हैं कि ये दबंग टाइप का प्राउड हिन्दू वर्ग (OBC) इनके लिए आज लास्ट ऑब्स्टकल बचा है)।

        फिलहाल तो हम जाट लोग जाट महाराजा सूरजमल को (OBC वर्ग के अन्य महापुरुषों को भी) "हिन्दू हृदय सम्राट" आदि लिख-बोल पा रहे हैं पर उपरोक्त दुष्ट समूह इसमें भयंकर आपत्ति करते हुए उन्हें "महान परंतु सेकुलर(?)" और केवल जाट राजा बनाने पर तुला है। क्योंकि हिंदुत्व के ऊपर जातिवाद इतना हावी पड़ता है कि खुद मेरे सोशल मीडिया लेखन को लाइक करने वाले कई लोगों की प्रोफाइल फोटो अचानक से किसान आंदोलन में राकेश टिकैत का कद बढ़ते ही और इसे जाट आंदोलन सा बनता देख राकेश टिकैत की हो गईं हैं...यानि कई लोग इस जातिवाद के भ्रमजाल में फंसने को तैयार बैठे हैं।

        भाइयो-बहनो! DharmikStance के हमारे इस ब्लॉग से आपके दिमाग में कुछ घण्टी बजे तो इसके मटीरियल को दूसरों को भी बांटें क्योंकि ब्रेकिंग इंडिया फोर्सेज के लिए लास्ट और सबसे मजबूत ऑब्स्टकल OBC (जाट,गुर्जर,यादव आदि) भी बहुत दिनों से वा-मियों के टारगेट पे इस तरह से है, ये बात कई प्राउड हिन्दू OBC मानने को तैयार नहीं है। कई तो उसी अहंकार में कहते हैं कि हम तो कट्टर हिन्दू हैं, जाट कभी हिंदुत्व से अलग नहीं होगा आदि आदि। अरे भाई! तुम तो पक्के हो पर जो कच्चे होंगे उनका क्या ? उन्हें तो उनका ब्रेनवाश होने के पहले ही ये समझाना होगा जैसे संभावित पोलियो से बचाव हेतु दो बूंद पोलियो ड्राप हर स्वस्थ बच्चे को शुरुआती उम्र में दे दी जाती हैं। इसपे जरूर ध्यान दें क्योंकि बात व्यक्ति की नहीं पूरी हिन्दू सभ्यता की है। हमें बार बार अपने आपको याद दिलाना होगा कि "War of Civilisation" अभी जारी है। हमारे ऊपर नित नए प्रकार के आक्रमण होंगे और हमें पहले से तैयार रहना होगा। ताकि ऐसे ब्रेकिंग इंडिया फोर्सेज से फंडेड उनके चमचे जहां भी ये अंट शंट विभाजनकारी ज्ञान देने लगें तो हर वर्ग का सामान्य सा हिन्दू युवा पलटकर इनको उचित उत्तर दे सके

Comments

  1. सही बात है भाई ऐसा ही चल रहा है आजकल

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    1. इससे लड़ना भी है न। प्रदीप भाई

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  2. यह हनुमान बेनीवाल वाला गलत लिखा तुमने यह लोग हनुमान बेनीवाल से नफरत करते है यह लोग हनुमान बेनीवाल को आरएसएस का एजेंट बताते है इन लोगो ने हनुमान बेनीवाल की राजनीति खत्म करने और कम्युनिस्ट & कांग्रेस को फायदा पहुचाने के लिए अभियान चला रखा है किसान सभाओं में हनुमान बेनीवाल को यह बुलाते नही कांग्रेस और कम्युनिस्ट को जरूर बुलाते है

    जितने भी जाटो के अध्य्क्ष बन के घूम रहे है वो हनुमान बेनीवाल के खिलाफ लिखते है

    ओर हाँ हनुमान बेनीवाल अपना जन्म दिन साल में 2 बार मनाते है एक हिन्दू तिथि के अनुसार एक अंग्रेजी तारीख के अनुसार

    इसमे हनुमान बेनीवाल वाला एंगल सही नही है बाकी सब सही है

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    1. गर्वित जी आशा तो मैं अब भी यही करता हूँ। पर मैं खुद ऐसे व्हाट्सएप्प ग्रुप और सोशल मीडिया के प्लेटफॉर्म का अनुभवी रहा हूँ । जहां इस पाप में हनुमान बेनीवाल की पार्टी के कैडर को शामिल पाया है। जो जाटों के धर्म की नई व्याख्या करने में आगे मिलते हैं उनमें अधिकतर उसकी पार्टी के सपोर्टर और प्रचारक भी हैं। क्योंकि उनको उसे एक जाट पार्टी बनाना है और ये बंटवारे का नैरेटिव कम्युनिष्टों का प्रिय हथियार है। उन्होंने राजस्थान में बड़ी जोर से जाट vs राजपूत कर रखा है। और ब्राह्मण तो उनके प्रिय दुश्मन हैं ही।

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  3. आज जाट से सिख बनेंगे और कल सिख से ईसाई

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    1. बिल्कुल सही पकड़े हैं तेजपाल जी। प्रोसेस का क्रम यही रहने वाला है। वरना इनको पता रहना था कि हिन्दू रहते हुए ही हम सहजधारी सिख भी रह सकते हैं, गुरूवाणी और गुरुद्वारा जाकर पूजा, सेवा, दर्शन सब करते हैं। जबरदस्ती अलग से कोई सिख बन लेने की नौटंकी हिन्दू पहचान को गाली देने के सिवाय और कुछ नहीं है।

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    2. बिल्कुल सही पकड़े हैं तेजपाल जी। प्रोसेस का क्रम यही रहने वाला है। वरना इनको पता रहना था कि हिन्दू रहते हुए ही हम सहजधारी सिख भी रह सकते हैं, गुरूवाणी और गुरुद्वारा जाकर पूजा, सेवा, दर्शन सब करते हैं। जबरदस्ती अलग से कोई सिख बन लेने की नौटंकी हिन्दू पहचान को गाली देने के सिवाय और कुछ नहीं है।

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  4. वाकई,ये नीच कम्युनिस्ट एजेंडा ही है,आज जिस तरह से इन घाघ वामियों ने दलित वर्ग में हिन्दू धर्म के विरुद्ध जैसा विष रोपण कीया है,,,तथाकथित भीमटे, अपनी सभाओं में हनुमान जी की प्रतिमा को जूतों से पीटते हुए दिखाई देते हैं,वह इसी नीच कम्युनिस्ट एजेंडे का ही हिस्सा है,,जो बाबा साहब कभी मूर्ति पूजा का निषेध किया करते थे,आजकल के नव भीमटे उन्हीं की मूर्ति मंदिर में रखकर पूजते हैं,,जिन मुस्लिमों को ये भीमवादी अपना भाई कहते नहीं थकते,,जय भीम जय मीम का नारा लगाते नहीं थकते,उन्होंने कभी बजी अपने पुरखे जोगिंदर नेठ मंडल को समझने की कोशिश नहीं कि,क्यों वह जान बचाकर पाक से भागकर पुनः भारत भाग आये,,अम्बेडकर जी के मुसलमानों,पाकिस्तान बारे,क्या विचार थे,ये इन नए चेलों नव कभी जाना ही नहीं,,लगातार हिन्दू एकता से पटेशन हुए वामपंथी दुष्टों की चाल ही है ये की किस तरश से इस एकता को छिन्न भिन्न किया जाए,,

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  5. बहुत बढ़िया लिखा है भाई अगर कुछ भाई समझ जाएं तो, हालांकि इस लेख में मेरे लिए कुछ भी नया नहीं है जो-जो आपने लिखा है यह सब कुछ मैं भी पिछले कुछ सालों से ऑब्जर्व कर रहा हूं। हमारे जाट समाज को हिन्दू धर्म से पृथक करने की गहरी साज़िश चल रही है।

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